Tuesday, 8 November 2016

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भारत का स्कोल्टलैंड " कुर्ग"

दक्षिण भारत की सैर "कुर्ग"
coorg

कर्नाटक का खूबसूरत  हिल स्टेशन  कुर्ग प्राकृतिक  रूप से बेहद ही खूबसूरत  है. इसकी  खूबसूरती की वजह  से ही इसे  भारत  का स्कॉटलैंड भी कहा जाता है. चारो  तरफ  बिखरी  प्राकृतिक खूबसूरती  तरह-तरह  के अनोखे  पेड़-पौधे, रंग-बिरंगे  जिव-जन्तु , कॉफी के बागान  और मसालो  की सुगन्ध  के साथ यहाँ  की खूबसूरत वादियां पर्यटको  को खूब आकर्षित  करती है....

कर्नाटक में स्थित कुर्ग यानि कोडागु को यु ही भारत का स्कॉटलैंड नही कहा जाता। चारो तरफ पहाड़, बादलो  की आवाजाही के बीच रिमझीम  फुहार और धुमावदार रास्तो से होते  हुए जैसे ही मंगलौर होते हुए कुर्ग की खूबसूरत घटी में पहुचते है। ताज़ी हवओ को अपनी सासो को मासूस कर सकते है।  यहाँ चारो तरफ प्रकृति की मनमोहक घटाए है,पहाड़ियों की घटियॉ के बीच से उठते कोहरे की लहरो की घटा देखने में निराली  लगती है, यहाँ की खासियत है सकरे  रस्ते से गुजरते  हुए कॉफी के पौधे को देखते जाना, कॉफी एस्टेट में घूमना कभी न भूलने वाला अनुभव हो सकता है। कुर्ग देश जिले में मडिकेरी, सोमवारपेट और विराजपेद  तीन  तालुके  है जिले का मख्यालय  मडिकेरी है, विराजपेट यहाँ का छोटा, लेकिन आकर्षक शहर है यहाँ  आसपास  कई खूबसूरत और आकर्षक पर्यटक स्थल है।
चेलवरा फॉल्स
ChelavaraFalls


कुर्ग के विराजपेट से करीब 16 किलोमीटर की दुरी पर खूबसूरत चेलवरा  फॉल्स है। यह कुर्ग के सबसे खूबसूरत फॉल्स में से एक है तंग रास्तो से होते हुए चेलवरा झील तक पहुचा जा सकता है। फॉल्स तक पहुचने के लिए रास्ता थोड़ा तंग और फिसलन भरा है। हरियाली के बिच से बहती इस झील की खूबसूरती देखते ही बनती है। करीब 150 फीट की ऊंचाई से गिरते चांदी की तरह सफेद पानी के उपडते छीदे आपको सरोबार क्र देगे, यह फॉल्स विराजपेट-तलकावेरी  सड़क से 3 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। आसपास का दिर्श्य बड़ा मनमोहक है यह एक प्राकृतिक फॉल्स है। जो थडियानडामोला से निकलती है। यह कोडागु का सबसे ऊँचा फ्वाइंट है।

चोमाकुंड हिल्स

चेलवरा झील से करीब 2 किलोमीटर आगे चोमकुंड हिल है। आसपास ऊंची-ऊंची चोटिया, चारो तरफ हरियाली और पीक से बदलो की आवाजाही को करीब से देखने या छूने का अपना एक अलग ही आनंद है। यह कर्नाट और केरल के कोडागु और कुन्नूर जिले का बॉर्डर भी है। चोमकुंड का ट्रेकिंग टेल्स मजेदार है। ट्रेकिंग के दौरान फिसलन की वजह से परेशानी भी हो सकती है। लेकिन सनसेट फ्वाइट पर पहुँच कर सारी परेशानी और थकान को भूल जाएगे , कयोकि यहाँ से सूर्य को अस्त होते हुए देखना बड़ा मनमोहक होता है।

इग्गुथप्पा मंदिर      
temple


 इग्गुथप्पा मंदिर का निर्माण राजा लिंगराजेन्द्र  ने वर्ष 1810 में करवाया था स्थनीय लोगो हर जरूरी कर्मकांड से पहले यहाँ आकर अपने ईष्ठदेव से आशिर्वाद लेने नही भूलते मंदिर के आसपास का दृश्य बड़ा आकर्षक है। इसके चोरो तरफ हरियाली देखते ही बनती है। मंदिर में प्रसाद के रूप में दाल, चावल, प्रसाद आदि दिया जाता है। खास बात यह है की प्रसाद या तिलक पोस्ट द्वारा भी मांग सकते है। एक बात और, इस मंदिर में भगवान के दर्शन के लिए पारपारिक परिधानों में ही प्रवेश की अनुमति है। पुरुष के लिए लुंगी या फिर धोती और महिलाओ के लिए साड़ी पहनना जरूरी है। मार्च में यहाँ पर वार्षिक पर्व मनाया जाता है। इस दौरान तुलाभरा में लोग अपने वजन के हिसाब से नारियल, चावल, फल आदि चढाते है।
नल्कनाड महल
यह कुर्ग से सबसे ऊंचे पर्वत थडियानडामोल के निचले हिस्से में स्थित है थडियानडामोल का मतलब होता है। डॉटर ऑफ़ द फेट लेडी. नल्कनाड महल अतीत की याद दिलाता एक खूबसूरत पर्यटक स्थल है। मडिकेरी से 45 किलोमीटर दूर इस महल को 1792 में डोडा वीरराज ने बनवाया था दो खंड का यह महल अपनी आकर्षक चित्रकारी और वास्तुकारी से सबको मोहित कर देता है। दीवारों और छतो पर पुरानी पेंटिंग और महल की वास्तुकला की खूबसूरती देखते ही बनती है। पुरानी जाने के बावजूद पेंटिंग अच्छी स्थिति में है। यहाँ पर दो डार्क रूम देखे जा सकते है। जिसे राजा ने अपने परिवार के साथ छुपने के लिए बनवाया था। इन दोनो डार्क रूम की खासियत है कि अगर कोई सफेद शर्ट पहन कर भी इसमें छुप जाए, तो उसे कोई देख नही पाएगा रानी के कक्ष में आज भी एक बड़ी पेंटिग लगी है। महल के अंदर फोटोग्राफी कि मनाही है। हालांकि प्रांगण में फोटोग्राफी कर सकते है। यहाँ पर कोई फिल्मों कि शूटिंग भी हो चुकी है।

तलकावेरी
 यह स्थल ब्रहमागिरि कि पहाड़ियों में स्थित है। यह दक्षिण भारत कि सबसे बड़ी नदी कावेरी का उदगम स्थल है। यहाँ से कावेरी नदी पहाड़ो के बीच से झरने कि तरह बहती है। समुद्र तल से इसके ऊंचाई करीब 1276 मीटर है। मंदिर के प्रांगण में कुंडीके है, जो कावेरी का उदगम स्थल है। लोगो प्रार्थना करने से पहले यहाँ के छोटे कुंड में स्नान करते है। पास के शिव मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। तलकावेरी तटपर हर साल अक्टूबर में भव्य मेला लगता है। मंदिर के प्रांगण में सीढिया है,जो आपको के ऊंची पहाड़ी पर ले जाएंगी। यहाँ से कुर्ग का खूबसूरत नजारा दिखाई देता है। एक तरफ बिछी हरियाली की चादर है, तो दूसरी ओर केरल की पहाड़ियां है। कावेरी में वाटर रॉफ्टिंग  का आनंद भी लिया जा सकता है

 कुशालनगर
यह शहर कुर्ग जिले के पूर्वी हिस्से में स्थित है। अगर मैसूर के रास्ते कुर्ग पँहुचते है। तो यह पहला बड़ा शहर है। यहाँ का तापमान आमतौर पर कुर्ग के दूसरे शहरो से भिन्न है। यहाँ मेडिकेरी की तरह न तो तापमान  ज्यादा कम होता है और न ही मैसूर की तरह ज्यादा गर्म। कुशालनगर तिब्बती मोनोसटि को लेकर प्रसिद्ध है, जिसके गुंबद पर खूबसूरत नक्काशी देखते ही बनती है। अंदर तीन बुद्ध एक पंक्ति में बैठे हुए है। दीवारों पर बुद्ध के खूबसूरत पेंटिंग्स लगी हुई है।

राजा सीट
कुर्ग आएं, तो राजा सीट जरूर जाएं। यहाँ से हरे-भरे बाग़ के अंदर राजा की ऐतिहासिक गद्दी है। यहाँ से पहाड़, बादलो और धुंध के बिच सिमटे कुर्ग का दृश्य देखकर आपका मन बाग़-बाग़ हो जाएगा। यहाँ से शाम के समय डूबते सूरज का दिलकश नजारा दिखाई देता है। यही वह स्थल है, जहां से कोडागू के राजा सूर्यास्त को निहारते थे।

मडिकेरी किला
मडिकेरी किला शुरुआत में मिटटी का बना था। इसका निर्माण मुछु राजा ने करवाया था। फिर टीपू  सुल्तान ने इसका पुनर्निर्माण करके इसमें पत्थरो का इस्तेमाल किया। यहाँ टीपू सुल्तान ने 18वीं सदी में कुछ समय के लिए शासन किया था। किले के अंदर लिंगायत शासकों का महल है। किले में एक पुरानी जेल, गिरिजाघर और मंदिर भी है। कुर्ग घूमने का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से अप्रैल है।

कैसे जाएं

नजदीकी एयरपोर्ट मैंगलोर है। जो करीब 135 किलोमीटर  और बेंगलुरु 250 किलोमीटर है। नजदीकी रेलवे स्टेशन मैसूर 120 किमी, की दुरी पर है। बेंगलुरु, मैसूर, मैंगलोर और हसन से नियमित बस सेवाएं और टैक्सी उपलब्ध है।

क्या खरीदे
कुर्ग में कॉफी और शहद का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। यहाँ से आप कॉफी, शहद, अंजीर, मसाले, इलायची, काली मिर्च, संतरे आदि खरीद सकते है। यहाँ के सिल्क साड़िया भी काफी मशहूर  है।

क्या खाएं
यहां पर वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन  के लिए कई सारी वेराइटीज उपलब्ध है। पांधी करी बंबू शूट करी, बेंबला करी, वोटी आदि  टेस्ट कर सकते है। यहां का कॉफी बेहद फेमश है। इसका स्वाद लेना न भूले।

काहां ठहरे
कुर्ग में रहने के लिए काफी अच्छी व्यवस्थाएं है। फाइव स्टार रिजोर्ट के साथ बजट होमस्टे की सुविधाएं भी है। विराजपेट में क्लब महिंद्रा का रिजोर्ट है। यहाँ रहने-खाने की अच्छी व्यवस्था है। यहाँ आसपास का इलाका बटरफ्लाई के लिए प्रसिद्ध है। इस रिजोर्ट को भी बटरफ्लाई के आकार में बनाया गया है। यहाँ पर सैलानियों के लिए स्वीमिंग पुल, एडवेंचर एक्टिविटीज, स्पॉ आदि की अच्छी व्यवस्थाएं है।
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