Tuesday, 16 May 2017

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बारिश में सुहाना सफर

Lonavala
आसमान से गिरती बारिश की बूंदें, लहलहाते हरे-भरे-पौधें, उफान मारती नदियां और झरनों के शोर के बीच खूबसूरत लोकेशन पर मानसून में घूमने का एक अलग ही आनंद है। इस दौरान प्रकृति की खूबसूरती और ज्यादा निखर उठती है...
भारत विविधताओं से भरा देश है। यहां बहुत से ऐसे डेस्टिनेशंस हैं, जहां का प्राकृतिक सौंदर्य बारिश के मौसम में नार ज्यादा खिल उठता है। इस दौरान ऐसा लगता है मानो पहाड़ ने पूरी तरह हरियाली की चादर ओढ़ ली हो। वैसे, मानसून में प्रकृति की खूबसूरती को निहारना अपने आप में एक लाइफटाइम एक्सपीरिएंस होता है। अगर आप उन लोगों में से हैं, जिन्हें भीगना पसंद है, तो भारत में ऐसे कई खूबसूरत मानसून डेस्टिनेशंस हैं, जहां हॉट कॉफी और पकौड़े के साथ मानसून का लुत्फ़ उठाया जा सकता है। हालांकि इन जगहों की सैर प्लान करने से पहले वेदर फोरकास्ट पर नजर जरूर डाल लें।

कोडइकनाल, तमिलनाडु
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बारिश की फुहारों से सराबोर होने की चाहत है, तो तमिलनाडु के हिल स्टेशन कोडइकनाल का प्लान बना लीजिए यह दक्षिण भारत का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है और यहां तक पहुंचना काफी रोमांचक होगा। मनमोहक सौंदर्य की वजह से इसे प्रिंसेज ऑफ़ हिल्स स्टेशंस भी कहा जाता है। खासकर मानसून के दौरान यहां का प्राकृतिक रंग-रूप देखने लायक होता है। खूबसूरती ऐसी की पलकें झपकने का नाम न लें।
एक ओर जहां आप फूलों की सुंगध से मंत्रमुग्ध हो जाएंगे, वहीं दूसरी ओर उतार-चढ़ाव वाले रास्तों और झरनों को देख कर कहीं और जाने का मन नहीं करेगा। कोडइकनाल में मौसम बहुत ही खुशनुमा रहता है। कोडई झील में बोटिंग झरना न भूलें। यह कोडइकनाल के ठीक बीच में स्थित है। झील के दूसरे छोर पर बने ब्रेंयत पार्क में फूलों की कई किस्में देखी जा सकती हैं बियर शोला फॉल्स, पिलर रॉक्स, फैरी फॉल्स, गोल्फ क्लब आदि देखने लायक जगहें हैं। सस्पेन्शन ब्रिज से फॉल्स को निहारने का अपना एक अलग ही आनंद है। यह समुद्र तल से करीब 2133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

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कैसे जाएं: कोडइकनाल का नजदीकी रेलवे स्टेशन व हवाई अड्डा मदुरै ( 120 किलोमीटर ) है। चेन्नई और कोयम्बटूर से सदरे सड़क, रेल और हवाई मार्ग से जुड़ा है। दिल्ली से चेन्नई तक सीधी ट्रेन और फ्लाइट की सेवा उपलब्ध है। मदुरै से कोडइकनाल तक बस या फिर  टैक्सी में तीन से चार घंटे में पहुंच सकते हैं।

लोनावला, महाराष्ट्र
मानसून के दौरान प्रकृति प्रेमियों के लिए महाराट्र पसंदीदा पर्यटन स्थल है। इस दौरान लोनावला हिल स्टेशन की सैर का अपना एक अलग आनंद है। ऐसा लगता है मनो सह्याद्रि के पहाड़ बारिश की फुहारों के साथ सोकर जग उठ हों। चारों तरफ फैली भरपूर हरियाली से यहां का सौंदर्य और खिल उठता है। खूबसूरत वाटरफॉल और आसपास के क्षेत्र में दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल दर्शनीय हैं। इस क्षेत्र में अभी भी कई प्राचीन बौद्ध मंदिर है। आपको बता दें कि इन मंदिरों का निर्माण पत्थरों को तराश कर किया गया था। अगर पुणे के आसपास कि जगहों कि बात करें, तो माथेरन, महाबलेशव, मालसेज घाट आदि अन्य लोकप्रिय और दर्शनीय पर्यटन स्थल हैं।
कैसे जाएं: मुंबई से लोनावाल कि दुरी करीब 84 किमी. है। यहां रेलवे स्टेशन भी है।

चेरापूंजी, मेघालय
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मानसून के दौरान मेघालय कि राजधानी शिलांग के आसपास के इलाकों में आमतौर पर देश के दूसरे भाग से ज्यादा बारिश होती है। हरी-भरी और सुंदर वादियों से घिरे शिलांग की छटा इन दिनों देखते ही बनती है। यहां से करीब 60 किलोमीटर की दुरी पर चेरापूंजी और मासिनराम दुनिया में सबसे अधिक वाले वर्षा क्षेत्र हैं। इन दोनों स्थानों के बीच करीब १६ किलोमीटर है। चेरापूंजी का वास्तविक नाम सोहरा है। इस मौसम में हरियाली के साथ घाटी का नजारा बेहद खूबसूरत लगता है। यहां से थोड़ी ही दुरी पर खूबसूरत झरना नोहकालीकाई है। यहां पर कई गुफाएं भी बनी हुई हैं, जिसमे से कुछ कई किलोमीटर लंबी है। वैसे, यहां की एक और खासियत है। यहां के लोग पेड़ों की जड़ों से झूलता हुआ पुल बना लेते हैं। अगर आप शिलांग जाएं, तो शिलांग पीक, हाथी झरना, मीठा झरना आदि देखना न भूलें।

Cherrapunji In Meghalaya
The Root Bridges of Cherrapunji In Meghalaya
कैसे जाएं: शिलांग जाने के लिए हवाई मार्ग सबसे अच्छा साधन है। शिलांग से 40 किलोमीटर की दुरी पर उमरोई एयरपोर्ट है। कोलकाता और गुवाहाटी से शिलांग के लिए सीधी फ्लाइट है। दिल्ली से कोलकता और गुवाहाटी के लिए भी सीधी उड़ानें हैं। गुवाहाटी शिलांग का नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जो शिलांग से 104 किलोमीटर की दुरी पर है।

वायनाड, केरल
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Pookot-Lake kerla
देश में ऐसी जगहों की कमी नहीं है, जहां की खूबसूरती बारिश की बूंदों के साथ और खिल उठती है। मानसून में घूमने का प्लान बना रहे हों, तो केरल को आप बिल्कुल भी भुला नहीं सकते, क्योंकि यह मौसम केरल घूमने के लिए सबसे बेहतरीन मन जाता है। गॉड ऑन कंट्री के नाम से मशहूर केरल के वायनाड में मानसून के दौरान देसी-विदेशी पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ जाती है। खास बात यह है कि हर साल मानसून टूरिज्म कार्निवल आयोजित करते हैं। इस दौरान यहां आने वाले टूरिस्ट आउटडोर एक्टिविटीज, जैसे-रिवर क्रासिंग, मड फुटबॉल, ट्रैकिंग, वॉकिंग ( कॉफी के बगीचों के बीच), टी एंड स्पाइस प्लांटेशन आदि में हिस्सा ले सकते हैं। नेचुलर ब्यूटी के आलावा, यहां वाइल्डलाइफ का लुत्फ़ भी उठाया जा सकता है। यह समुद्र तल से करीब 2100 मीटर कि ऊंचाई पर स्थित है। चारों तरफ फैली हरियाली के साथ धुंध से भरी पहाड़ियां और शुद्ध हवा आपको वायनाड की सैर का अविस्मरणीय अहसास देगी। यहां आप प्रकृति के मनोरम दृश्यों, खूबसूरत पहाड़ी ढलानों, हरे-भरे घास, खुशबूदार वनस्पति, घने जंगलों के अलावा, यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासतों से भी रूबरू हो सकते हैं।
कैसे जाएं: नजदीकी एयरपोर्ट और स्टेशन कोझिकोड एयरपोर्ट ( 25 किमी ), कोझिकोड रेलवे स्टेशन है। यह केरल के तमाम इलाकों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। नेशनल हाइवे 17 इसे दूसरे इलाकों से जोड़ता है। कोझिकोड से वायनाड आसानी से पहुंचा जा सकता है।

जोग फॉल्स, कर्नाटक
जोग फॉल्स कर्नाटक के शिमोगा जिले में है। यह शिमोगा से करीब 105 किमी. की दुरी पर स्थित है मानसून में घूमने के लिहाज से बेहतरीन जगह है। यह झरना क्षावती नदी पर 900 फ़ीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। यह नदी चार अलग-अलग स्थानों पर गिरती है। मानसून के दौरान जोग फॉल्स की सैर अपने-आप में कभी न भूलने वाला अनुभव होगा। चारों तरफ फैली हरियाली और सुहावने मौसम की वजह से वातावरण और भी मनोरम हो जाता है।
कैसे जाएं: दिल्ली से बेंगलुरु से जोग फॉल्स की दुरी करीब 450 किलोमीटर है। बेंगलुरु से करीब छह घंटे की ड्राइव कर जोग फॉल्स पहुंच सकते हैं।

मानसून में गो-गो गोवा...
मानसून मने घूमने के लिए गोवा सबसे उपयुक्त माना जाता है। यहां कलंगुट बीच, बागा बीच आदि पर्यटकों के बीच आकर्षण के खास केंद्र होते हैं। वैसे, गोवा केवल बीचेज के लिए ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक चर्चों और मंदिरो के लिए भी प्रसिद्ध है।
 

यहां भी घूमें...
मानसून के दौरान आप अंडमान एंड निकोबार द्वीप समूह, कुर्ग ( कर्नाटक ), मुन्नार ( केरल ), उदयपुर (राजस्थान ), पुड्डुचेरी, दार्जिलिंग ( पश्चिम बंगाल), पुष्कर (राजस्थान ), रानीखेत (उत्तराखंड ), माउंट आबू ( राजस्थान ), ओरछा ( मध्य प्रदेश ), कच्छ ( गुजरात ), अलीबाग (महाराष्ट्र ), अल्लेपी ( केरल ), कौसानी ( उत्तराखंड ), की सैर प्लान कर सकते हैं। इस दौरान यहां प्रकृति को नए रंग-रूप में देख सकते हैं।

ये सामान ले जाना न भूलें...
मानसून में घूमने जा रहे हैं, तो कुछ खास चीजें ले जाना न भूलें। उस शहर का मैप, बरसाती, छाते, टार्च, ग्रिप वाले जूते, मेडिसिन आदि जरूर रख लें। साथ में कुछ ऐसे कपड़े रख लें, जो जल्द कुछ जाते हों। मानसून में घूमना अपने आप में एक एडवेंचर है। इसलिए जहां जा रहे हैं, वहां के मौसम की पूरी जानकारी पहले ही जुटा लें, तो बेहतर होगा।
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