Tuesday, 15 August 2017

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Top 5 Places to visit in Tibet

Potala_Palace
Tibet_Lhasa_Potala_Palace
प्रकृति की खूबसूरती को निहारना हो तो तिब्बतियों की सांस्कृतिक राजधानी ल्हासा पहुंच जाइए, यहां के हसीन नजारों को देखते हुए एएस एहसास होगा, जैसेकि आप किसी बड़े पर्दे पर कल्पना लोक की सैर कर रहे हों...
 
तिब्बत बेहद खूबसूरत जगह है। बौद्धों के लिए ल्हासा तीर्थ की तरह ही है। इसे दुनिया की छत भी कहा जाता है। बौद्ध संस्कृति से जुड़े इस शहर में कई बौद्ध स्थल हैं। यहां का सूर्योदय देखने लायक होता है। सुबह निकलने वाली चमकती धुप के कारण इसे सनशाइन सिटी भी कहा जाता है। रात में यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है, वहीं बारिश भी होती है। दिनभर की धुप और गर्मी से राहत दिलाती इस बारिश का मजा ही कुछ और है। यह एशिया की कुछ बड़ी नदियों का जन्मस्थल भी है। ऐसे में यदि आप भी तिब्बत घूमने की योजना बना रहे हैं, तो इससे न सिर्फ आपको वहां के प्राकृतिक सौंदर्य का बोध होगा, बल्कि आप तिब्बत की सभ्यता व संस्कृति से भी रूबरू हो सकेंगें। तिब्बत में यूँ तो घूमने के लिए बहुत-सी जगहें हैं, लेकिन यहां हम आपको ऐसे 'फाइव स्टार' के बारे में बताने जा रहें हैं, जहां आपको घूमकर आना ही चाहिए और बिना इन्हें देखे तिब्बत की यात्रा पूरी नहीं कही जा सकती है।

पोटाला पैलेस
यह पैलेस तिब्बत के मशहूर पर्यटन स्थलों में से एक है और तिब्बत की राजधानी ल्हासा की लाल पहाड़ियों पर स्थित है। इसका निर्माण तिब्बत के सम्राट सोंगसन गेम्पो ने सातवीं शताब्दी में कराया था, जबकि 17वीं शताब्दी के दौरान दलाईलामा ने इसका विस्तार किया। वर्ष 1994 में इसे यूनेस्को के वैशिवक धरोहर स्थलों में शामिल कर लिया गया। इसमें सफेद वाला पैलेस प्रशासनिक बिल्डिंग और रेड पैलेस धार्मिक बिल्डिंग हैं, जहां पर भगवान बुद्ध की प्रार्थना के लिए कई कमरे बने हुए हैं। यह अपने इमारतों और बनावट के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां के सभी स्तूप सोने की परत से ढके हुए हैं।

जोखांग मंदिर
jokhang temple
यह पुराने ल्हासा के मध्य में स्थित है और तिब्बतियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जोखांग तिब्बत की राजधानी ल्हासा स्थित एक प्रसिद्ध बौद्ध मठ है, जो दुनियभर से आए हजारों सैलानियों और बौद्ध लोगों की अपनी ओर आकर्षित करता है। इसका निर्माण ७वीं शताब्दी में राजा सोंगसन गेम्पो ने करवाया था। मंगोलों ने कई बार इसे बर्बाद करने की कोशिश की, लेकिन फिर भी इसे जमींदोज न कर पाए। यह मठ 25 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैला है। जोखांग मठ ल्हासा के पोटाला पैलेस के नजदीक ही स्थित है। पोटाला पैलेस से पैदल जाने पर लगभग दस मिनट लगते हैं। जोखांग मठ के सामने विशाल चौक पर पहुंचते ही, दूर से मठ के दरवाजे पर लगे बौद्ध सूत्र झंडियां दिखाई देती हैं। मठ के प्रांगण में घुसते ही विभिन्न भवनों से उठ रहे धुआं, मठ का चमकीला गुंबद और घी की खुशबु से भरा वातावरण सुंगधित लगता है। हर साल यहां काफी बड़े स्तर पर सामूहिक पूजा का आयोजन किया जाता है।

बरखोर स्ट्रीट
Barkhor-Street
तिब्बत की राजधानी ल्हासा के बीच में ये बहुत ही पुरानी गलियां हैं। यहीं पर आपको तिब्बतियों की संस्कृति, उनके धर्म, उनकी कला और आर्थिक स्थित से रूबरू होने का मौका मिलता है। बरखोर एक सड़क है, जो सदियों से जोखांग मंदिर के चारों ओर फैली हुई है। बौद्ध श्रद्धालु यहां रोजाना चक्र लगते हैं। यहां पर आपको ट्यूबों पीरियड भी जरूर जाना चाहिए, जहां पर 120 से ज्यादा हेंडिसॉफ्ट की दुकानें और 200 से ज्यादा स्टॉल हैं। आपके लिए यहां से शॉपिंग करना काफी बेहतर हो सकता है और ल्हासा आने वाले पर्यटक यहां शॉपिंग का कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहते हैं। आप यहां से तिब्बत से संबंधित कोई भी वस्तु खरीद सकते हैं।

डेपुंग मठ
drepung-monastery
डेपुंग मठ तिब्बती बौद्ध धर्म के छह प्रमुख मंदिरों में से एक है, जो तिब्बत की राजधानी ल्हासा शहर के पश्चिमी उपनगर में स्थित है। वर्ष 1416 में डेपुंग मठ का निर्माण हुआ था, अब यह तिब्बत में सबसे बड़ा मंदिर है। डेपुंग मठ के आसपास घना जंगल है और मंदिर के सामने ल्हासा नदी और विशाल मैदान है। डेपुंग मठ हरेक पीढ़ी के दलाई लामा का मंदिर रहता है, जिसका धार्मिक स्थान भी सर्वोच्च माना जाता है। मंदिर में मुख्य इमारतों का निर्मणा मिंग और छिंग राजवंशों के काल में किया गया था। आज  भी मंदिर के अंदर बड़ी मात्रा में धार्मिक ग्रंथ और सांस्कृतिक अवशेष संरक्षित हैं। 1951 के बाद सरकार ने डेपुंग मठ के जीर्णोद्धार और सांस्कृतिक अवशेषों के संरक्षण को महत्व दिया है। मंदिर साधुओं के लिए धार्मिक गतिविधियां चलाने का स्थल है। वर्ष 1982 में डेपुंग मठ को राष्ट्रीय स्तर का सांस्कृतिक संरक्षित स्थल निर्धारित किया गया। वर्ष 1980 के दशक में सरकार ने इस मंदिर के जीर्णोद्धार पर काफी पैसा खर्च किया था। डेपुंग मठ देशी-विदेशी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है।

तिब्बत म्यूजियम
tibet museum
नॉरबुलिंका के दक्षिण-पूर्व में स्थित तिब्बत म्यूजियम यहां का पहला आधुनिक म्यूजियम है। यहां पर आपको शानदार पारंपरिक तिब्बती स्थापत्य शैली देखने को मिलती है। म्यूजियम में प्रागैतिहासिक काल के अवेशष भी देखने को मिलते हैं, जिनमें विभिन्न मुद्राओं में भगवान बुद्ध की मूर्तियां भी शामिल हैं। यहां आपको शाही मुहर, विभिन्न योद्धाओं द्वारा दिए गए गिफ्ट के साथ ही संस्कृत व तिब्बती भाषा का काफी साहित्य मिलेगा। यहां पर आप तिब्बतियों की लोकशैली से भी रूबरू हो सकते हैं।

क्या खाएं
तिब्बती में आपको चाइनीज, नेपाली, वेस्टर्न और भारतीय फ़ूड मिल जाएंगे। आमतौर पर तिब्बती फ़ूड में मटन का इस्तेमाल ज्यादा होता है। यदि आप मटर चाय नहीं पी सकते हैं तो मिल्क चाय का मजा जरूर उठा सकते हैं। यहां अलग-अलग तरह से बनाए जाने वाले नूडल्स का लुफ्त भी उठा सकते हैं।

कब जाएं
तिब्बत के मौसम की खासियत है कि यहां सुबह में गुनगुनी धुप निकलती है और रात के समय यहां खूब ठंड पड़ती है। यहां ठंड मौसम के साथ बारिश का लुफ्त भी उठाया जा सकता है। आमतौर पर तिब्बत घूमने के लिए मार्च से अक्टूबर का महीना सबसे अच्छा माना जाता है।

कैसे जाएं
रेल, सड़क और वायु मार्ग से ल्हासा जुड़ा हुआ है। आप चाहें, तो तिब्बत चीन या फिर नेपाल के रास्ते भी पहुंच सकते हैं। दिल्ली-काठमांडू होते हुए भी ल्हासा जा सकते हैं।
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