Wednesday, 23 August 2017

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छोटे शहरों का बड़ा आकर्षण

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Diskit-Monastery
पर्यटकों को आकर्षित करने के मामले में केवल बड़े शहर ही आगे नहीं हैं, बल्कि अब सैलानी छोटे शहरों और गावों की तरफ भी रुख करने लगे हैं। भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से दूर कुछ अलग तरह की यात्रा का अनुभव लेना चाहते हैं, तो ये डेस्टिनेशंस आपको मायूस नहीं करेंगे...

 
लकड़ियों और पत्थरों के मकान, दूर-दूर तक फैली हरियाली, खेतों में लहलहाती फसलें, शांत वातावरण, भोले-भाले लोग और स्थानीय व्यंजनों का लाजवाब स्वाद..., भला किसे आकर्षित नहीं करेगा। हम बात कर रहे हैं भारत के उन छोटे गावों और शहरों की, जो पर्यटकों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। खासकर शहरी लोगों के लिए यह किसी वंडरलैंड से कम नहीं है।

दिसकित गावं, लद्दाख
जम्मू-कश्मीर का लेह-लद्दाख किसी भी पर्यटक के लिए एक ड्रीम डेस्टिनेशन है। वैसे, लेह-लद्दाख में दर्शनीय जगहों की कोई कमी नहीं हैं, लेकिन लेह से करीब 120 किलोमीटर की दुरी पर स्थित दिसकित  गांव की बात ही कुछ और है। नुबरा वैली का मुख्यालय यह छोटा-सा गांव बैगपैकर्स, बाइकर और टूरिस्ट के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन के तौर पर उभरा है। समुद्रतल से करीब 10,300 फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित इस गांव को आप चाहें, तो पैदल केवल आधे घंटे में पूरा घूम सकते हैं। लेह से जीप या फिर बाइक से करीब 5 घंटे में दिसकित पहुंच सकते हैं। यहां के मुख्य आकर्षण की बात करें, तो दिसकित में गोम्पा प्रमुख है। पर्वत की चोटी पर स्थित यह गोम्पा बेहद खूबसूरत है, जिसे आप अपने कैमरे में कैद करना न भूलें। यहां का दूसरा मुख्य आकर्षण 106 फ़ीट ऊंची भगवान बुद्ध की मूर्ति है। यहां के लोगों के रहन-सहन को करीब से देखने-जानने के लिए गांव की पैदल यात्रा ही सही है। खास बात यह है की यहां पर रहें के लिए गेस्ट हाउस और प्राइवेट लग्जरी होटल्स भी हैं। यहां के ढाबे में स्वादिष्ट नूडल सुप और मोमोज का लुफ्त उठा सकते हैं। दिसकित गांव की सैर के लिए आदर्श समय जून से सितम्बर का महीना है। गर्मी के महीनों में भी रात के समय तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। नुबरा वैली घूमने का प्लान हो, तो दिसकित जाना न भूलें।

मांडवा, राजस्थान
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मांडवा एक छोटा शहर है, जो राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र के झुंझुनू जिले में स्थित है। यह इस क्षेत्र का बेहद पुराना शहर है। खासकर जिन लोगों की दिलचस्पी आर्ट और कल्चर में हैं, उनके लिए एक आदर्श जगह है। प्राचीन सिल्क रुट के दौरान व्यापारी यहां आकर ठहरते थे। इस छोटे से शहर में कई खूबसूरत किले और हवेलियां हैं, लेकिन यहां का मुख्य आकर्षण स्थानीय लोगों द्वारा बनाई जाने वाली पेंटिंग्स व क्राफ्ट्स हैं। इस शहर को आप ओपन आर्ट गैलरी भी कह सकते हैं, क्योंकि शहर में हर तरफ आपको पेंटिंग्स दिखाई दे जाएंगी। यहां हवेलियों और किलों की वास्तुकला भी देखने लायक है। यह जगह जयपुर से करीब 190 किलोमीटर की दुरी पर है। इसके आसपास भी देखने लायक बहुत ही खूबसूरत जगहें हैं। नवलगढ़ मांडवा से करीब 37 किलोमीटर की दुरी पर है। यह अपने किले के लिए लोकप्रिय है। यहां कई साडी पुरानी हवेलियां भी देखने को मिल जाएंगी। मांडवा के करीब 43 किलोमीटर की दुरी पर परशुरामपुर है। यहां पर शेखावटी क्षेत्र की बहुत पुरानी पेंटिंग्स देखी जा सकती हैं। बात झुंझुनू की करें, तो यहां खेत्री महल, बिहारीजी मंदिर, मोदी हवेली, कनिराम नरसिंहदास टिबरवाला हवेली आदि दर्शनीय जगहें है।

मावल्यानाग गांव, मेघालय
Meghalaya
Mawlynnong, Meghalaya
मेघालय का यह छोटा-सा गावं भारत में ही नहीं, बल्कि पुरे एशिया में प्रशिद्ध है। इस गांव की ख्याति इसकी साफ-सफाई को लेकर है। इसे एशिया का सबसे साफ-सुथरा गांव माना जाता है। शिलांग जाने वाले पर्यटक भी अब इस गांव में भी पहुंचने लगे हैं। यह शिलांग से करीब 90 किलोमीटर की दुरी पर है। यहां बस और टैक्सी के जरिए भी पहुंचा जा कसता है। यह केवल सफाई के मामले में ही आगे नहीं है, बल्कि यहां की साक्षरता भी शत-प्रतिशत है।
यहां के ज्यादातर लोग अंग्रेजी में ही बात करते हैं। यहां के लोग घर से निकलने वाले कूड़े-कचरे को बांस से बने डस्टबिन में जमा करते हैं और उसे एक जगह इकट्ठा कर खेती के लिए खाद की तरह इस्तेमाल करते हैं। इस गांव के आसपास घूमने लायक काफी दिलचस्प जगहें भी हैं। वाटरफॉल, लिविंग रुट ब्रिज, बैलेंसिंग रॉक्स आदि देखने लायक जगहें है। खास बात यह है की लिविंग रुट ब्रिज आपको केवल मेघालय में ही दिखने को मिलेंगे। यहां पेड़ों की जड़ों से बने प्राकृतिक पुल देखना न भूलें।

तेककड़ी, केरल
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मानसून के मौसम में केरल घूमने के लिए आदर्श जगह है। केरल में स्थित तेककड़ी वाइल्डलाइफ के साथ मसालों यानी काली मिर्च, इलायची, लौंग, दालचीनी आदि की खेती के लिए भी मशहूर है। यह कोच्चि से करीब 190 किलोमीटर की दुरी पर है। पश्चिमी घाट की पहाड़ियों पर बसा तेककड़ी दूसरे हिल स्टेशनों की तुलना में शांत जगह है। यहां के हरे-भरे जंगल और मसालों की सुगंध आपको ताजगी से भर देती है। हर साल बड़ी संख्या में टूरिस्ट वन्य जीवों को करीब से देखने के लिए यहां पहुंचते हैं। तेककड़ी पेरियार अभ्यारण्य के लिए भी प्रसिद्ध है। यह अभ्यारण्य हाथी, सांभर, बाघ, जंगली सूअर, शेर पूंछ मकाक, नीलगिरि तहर, मालाबार विशालकाय गिलहरी और नीलगिरि लंगूर का बसेरा है। यहां पर आप हाथी की सवारी के अलावा पेरियार झील में बोटिंग करते हुए या किनारे पर घूमते हुए जंगली पशु-पक्षियों को देख सकते हैं। इसके अलावा, इडुक्की आर्क डैम भी देख सकते हैं, जो पेरियार नदी पर बना हुआ है। यह डैम कुरुवनमाला और कुरुथीमाला पहाड़ियों के बीच बनाया गया है, जो सैलानियों को खूब आकर्षित करता है।
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