Sunday, 15 April 2018

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"jatayu nationl park" new destination for adventure lover

KERALA, INDIA
JATAYU PARK
रामायण की कथा में आपने जटायु के बारे में जरूर पढ़ा, सुना या देखा होगा। इस पौराणिक थीम पर केरल में पहाड़ के ऊपर विकसित किया गया जटायु नेशनल पार्क केरल  में एडवेंचर का एक नया डेस्टिनेशन होगा। यह पार्क केरल राज्य के कोल्ल्म जिले में स्थित जटायुमंगलम नाम से प्रसिद्ध चदयामंगलम क्षेत्र में है, जिसे जटायु अर्थ सेंटर के नाम से भी जाना जाता है। इस पार्क की थीम विख्यात फिल्म निर्देशक राजीव आंचल ने तैयारी की है। यह केरल राज्य का पहला ऐसा उधान है, जो सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर्यटन के तहत बनाया गया है।

सबसे बड़ी पक्षी मूर्ति
जटायु नेशनल पार्क में बनी जटायु की मूर्ति विश्व की सबसे बड़ी पक्षी की मूर्ति के लिए गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल होगा। इस पार्क में बनाई गई पौराणिक पक्षी जटायु की मूर्ति करीब 200 फ़ीट लंबी और 150 फ़ीट चौड़ी है। इस मूर्ति की ऊंचाई 70 फ़ीट है। समुद्रतल से करीब 750 फ़ीट की ऊंचाई पर बनी विश्व की सबसे बड़ी पक्षी प्रतिमा के चलते यह उधान दुनियाभर के पर्यटकों के बीच आकर्षण का नया केंद्र होगा।



द रॉक थीम पार्क
यह पार्क सिर्फ अपनी विशालकाय प्रतिमा के लिए ही नहीं, बल्कि अपने नैसर्गिक सौंदर्य और एडवेंचर गेम्स के लिए भी जाना जाएगा। इस पार्क में अतिविशिष्ट डिजिटल म्यूजियम, 6 डी थियेटर, आयुर्वेदिक व सिद्ध गुफा रिसॉर्ट आदि तैयार किए गए हैं। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए यहां पेंट बॉल, लेजर टैंग, राइफल शूटिंग, रॉक क्लाइबिंग, रैपलिंग तथा बोल्डरिंग जैसी 20 से अधिक रोमांचक गतिविधियों की व्यवस्था है।
इस विशालकाय मूर्ति तक पहुंचने के दो साधन हैं। एक रोपवे है, जिसके जरिए जटायु नेशनल पार्क के टॉप पर पहुंच सकते हैं। इस रोपवे के देश के सबसे बेहतरीन रोपवे में से एक माना जा रहा है, जो अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। दूसरा, आप ट्रैकिंग के जरिए भी इस भव्य मूर्ति तक पहुंच सकते हैं। रोमांचक और मजेदार चट्टानी चढ़ाई करके हिलटॉप पर पहुंचा जा सकता है। विश्वभर में नाम कमाने वाली इस विशाल मूर्ति व पार्क को तैयार करने के लिए पहले फेज में करीब 100 करोड़ रूपये की लागत आई है। इसका एडवेंचर एरिया तीन किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है।

ईको-फ्रेंडली पार्क
यह उधान ईको-फ्रेंडली गंतव्य भी है, जहां प्लास्टिक को पूरी तरह से बैन रखा गया है। इस उधान में बारिश के पानी को संरक्षित कर ओषधीय पौधे उगाए गए हैं, जो स्थानीय नागरिकों को रोजगार के अवसर भी प्रदान करेंगे। पार्क में शराब तथा नॉन-वेज खाने को पूरी तरह से प्रतिबंधित रखा गया है। पर्यटकों के लिए स्वादिष्ट व सात्विक भोजन का प्रबंध है।

पौराणिक कथा
पौराणिक ग्रंथ रामायण के अनुसार जब रावण श्रीराम की अर्द्धांगिनी सीता का हरण कर लंका ले जा रहा था, तब गरुड़ राज जटायु ने सीता माता को मुक्त कराने के लिए रावण से मुकाबला किया था। धर्महित में जटायु ने निडरता और बहादुरी का परिचय देते हुए रावण से लोहा लिया, लेकिन रावण ने अपनी शक्ति के बल से इस जटायु के पंख काट दिए। माना जाता है कि उस धर्मयुद्ध में पंख कट जाने के बाद जटायु चदयमंगलम की इसी पहाड़ी पर आ गिरे थे। जब श्रीराम और लक्ष्मण सीता माता की खोज में निकले थे, तब यहीं पर जटायु ने उन्हें बताया था कि असुरराज रावण माता सीता का बलपूर्वक हरण कर उन्हें दक्षिण दिशा की ओर ले गया है।



कैसे पहुंचें
हवाई यात्रा: तिरुवनंतपुरम जनदीकी हवाई अड्डा है, जो तकरीबन 54 किलोमीटर की दुरी पर है। यह एयरपोर्ट देश के अन्य मार्गों के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय हवाई मार्गों से भी जुड़ा है।

रेल यात्रा: जटायु पार्क के लिए नजदीकी रेलवे जंक्शन कोल्ल्म है, जो तकरीबन 39 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है। यह रेलवे जंक्शन अन्य रेल मार्गों से अच्छे से जुड़ा है। यहां से पार्क के लिए आसानी से ट्रांसपोर्ट उपलब्ध है।

सड़क यात्रा: कोल्ल्म के अन्य इलाको से नियमित रूप से चदयमंगलम के लिए बसे चलती हैं। इसके बाद रोपवे से या ट्रैकिंग करते हुए पार्क तक जा सकते हैं। 
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